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PrimaryKaMaster: यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार


■ केंद्र निर्धारण के साथ में शुरू हो जाता है नकल माफियाओं का खेल 
■ हर साल हाईकोर्ट में वित्तविहीन स्कूलों की ओर से होती हैं याचिकाएं
● ऑनलाइन केंद्र निर्धारण के बावजूद नहीं बंद हुआ नकल का खेल


यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए हर साल केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में होड़ लगती है। यही कारण है कि हर साल केंद्र बनने के लिए वित्तविहीन स्कूलों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं होती हैं। 



ऐसे में सवाल है कि वित्तविहीन स्कूलों में बोर्ड परीक्षा कराने की आखिरकार ऐसी भी क्या जिद है। एक बार मुकदमा करने में कम से कम 25 हजार रुपये खर्च होता है। साफ है कि शुचितापूर्वक और नकलविहीन परीक्षा की बजाय आर्थिक लाभ के उद्देश्य से वित्तविहीन स्कूल के प्रबंधक इतने रुपये फूंकते हैं।


इसी लालच का परिणाम बलिया जिले में देखने को मिला कि परीक्षा के एक दिन पहले ही पेपर आउट हो गया। बलिया में ये पहली बार नहीं हुआ है। 2019 और 2020 की परीक्षा में भी प्रश्नपत्र आउट हुए थे। हकीकत में 2019 से ऑनलाइन केंद्र निर्धारण की व्यवस्था लागू होने के बावजूद जिला स्तर पर हस्तक्षेप पूरी तरह से बंद नहीं। है। हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन स्कूल तक ऑफलाइन बनाए जाते हैं। इनमें प्रभावशाली लोगों के स्कूलों के केंद्र बनने से लेकर रुपयों के लेनदेन के आरोप भी लगते रहे हैं।


 
 बलिया के निलंबित जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ कई विभागीय जांचें चल रही हैं। जौनपुर में बतौर डीआईओएस 123 शिक्षकों की अवैध नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट तक गया था जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा ब्रजेश मिश्र के खिलाफ चल रही कई प्रतापगढ़ में भी अवैध नियुक्तियों के मामलों की जांच लंबित है। हरदोई में जब वह बीएसए थे जब एक रसोईया ने उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई थी। बलिया में भी उनके खिलाफ कई शिकायतें प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक की गई हैं।


मेरी याचिका पर ही हाईकोर्ट ने ऑनलाइन केंद्र निर्धारण का आदेश दिया था। कहने को 2019 से ऑनलाइन केंद्र बन रहे हैं लेकिन हकीकत में हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन तक ऑफलाइन केंद्र बनाए जाते हैं। ऐसे स्कूल सेंटर बनते हैं जो मानक में फिट नहीं बैठते और कम्प्यूटर भी उन्हें केंद्र नहीं बनाता। नकल का खेल रोकना है तो पूरी तरह से केंद्र निर्धारण ऑनलाइन करना होगा। - जियारत हुसैन, प्रधान महासचिव वित्तविहीन शिक्षक महासभा


केंद्र बनने के लिए जो वित्तविहीन स्कूल याचिकाएं करते हैं निश्चित रूप से उनके अपने हित होते हैं। उनका उद्देश्य केवल केंद्र बनना होता है। - अमरनाथ वर्मा, पूर्व सचिव यूपी बोर्ड व पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक



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